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महलों झीलों और खुबसूरत किलों का शहर : बूंदी

Posted by anvin404 on October 24, 2017
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बूंदी का इतिहास :

प्राचीन समय में कई स्थानीय जनजातियों ने बूंदी अपना आवास बनाया था। इन सभी जनजातियों में सबसे प्रमुख लोगों में परिहार मीणा थे। ऐसा माना जाता है कि बूंदी का नाम महान राजा बूंदा मीणा के नाम पर पड़ा है। वर्ष 1342 में राव देवा हाडा ने बूंदी को जैता मीणा से जीता और यहां शासन किया। इन्होंने यहां के आसपास के क्षेत्र को हाडावती या हाडोती नाम दिया। हाडा राजपूतों ने लगभग 200 वर्षाें तक इस क्षेत्र पर शासन किया। वर्ष 1533 में उनके शासन का अंत हो गया अाैर इसके बाद मुगलाें ने इसे अपने अधीन कर लिया।

प्रमुख शैलियाँ :

मुगलों की अधीनता में आने के बाद यहां की चित्रकला में नया मोड़ देखा गया। यहां की चित्रकला पर मुगल प्रभाव बहुत अधिक बढ़ने लगा। राव रत्नसिंह (1631- 1658 ई.) ने कई चित्रकारों को अपने दरबार में आश्रय दिया। शासकों के सहयोग अाैर समर्थन तथा अनुकूल परिस्थितियों एवं नगर के भौगोलिक परिवेश की वजह से 17वीं शताब्दी में बूंदी ने चित्रकला के क्षेत्र में काफी प्रगति की। चित्रों में बाग, तारों भरी रातें, पेड़ पौधें, बतख तथा मयूरों, फव्वारे, फूलों की कतारें आदि का समावेश मुगल शासन से होने लगा और साथ ही स्थानीय शैली भी विकसित होती रही।

बूंदी के उत्सव :

काली तीज बूंदी का प्रमुख त्यौहार है जिसे यहां धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया जाता है। दो दिन चलने वाला यह त्यौहार हिंदू महीने भाद्र (जुलाई से अगस्त) के तीसरे दिन से होती है। संगीत एवं चित्रकला बूंदी की संस्कृति का एक प्रमुख हिस्सा हैं। इस कारण यहां अनेक गायकों एवं संगीतकारों का निवास है।

क्या क्या है देखने को :

तारागढ़ किला – बूंदी का सबसे खूबसूरत आकर्षण है तारागढ़ किला जिसे 1354 में बनवाया गया था। सदियों से ये किला ऐसे ही मजबूती के साथ खड़ा है। इस किले से आप पूरे शहर को देख सकते हैं। इसके अलावा तारागढ़ किले के तीन दरवाज़े हैं जिनका नाम गुदी की फाटक, लक्ष्मी पोल और फुटा दरवाज़ा है। तारागढ़ किले के कमांडर के सम्मान में इस स्थान को मीरन साहेब की दरगाह कहा जाता है। घनी वृक्षावलियों युक्त पहाड़ी पर खड़ा अद्भूत सफेद गढ़ अपने अनूठे निर्माण से अजेय किलों की श्रेणी में गिना जाता है। दुर्ग में बना विशाल जलाशय कभी गढ़ में पानी उपलब्ध कराता था। किले के भीतर कई आकर्षक स्मसरक हैं जिनमें भीम बुर्ज प्रमुख है। यह आज यह दुर्ग बूंदी का प्रमुख आकर्षक है। इस किले का एक चक्कर आपको प्राचीन सदी में लेकर जाएगा। यह गढ़ राजस्थान के अत्यधिक प्रभावशाली गढ़ों में से एक हैं।

सुख महल – बूंदी जब उमेद सिंह के राज्य में था तब उन्होंने झील जैत सागर की सीमा पर सुख महल बनवाया था। इस महल को छतरी ने ढका हुआ है और यही इस महल का सबसे आकर्षित हिस्सा भी है। ये हिस्सा दूसरी मंजिल में देखने को मिलेगा। रुद्रयार्ड किपलिंग की किम किताब में इस महल की काफी तारीफ की गई थी जिसके बाद इस महल को पूरी दुनिया में ख्याति प्राप्त हुई। इस किताब में सुख सागर महल के जिक्र के कारण यहां पर एक फिल्म की शूटिंग भी की गई थी।

नवल सागर झील – राजस्थान के बूंदी में नवल सागर झील एक प्रमुख पर्यटन आकर्षण है। झील नवल सागर एक कृत्रिम झील है जो शहर के बीचोंबीच स्थित है। ये बूंदी का सबसे मुख्य आकर्षण है और इसके आसपास कई स्टैपवैल भी हैं। झील के मध्य में एक मंदिर भी है जो भगवान वरुण को समर्पित है। पहले ये झील कुओं तक पानी पहुंचाने का मुख्य स्रोत था लेकिन अब इसे पर्यटन स्थल बना दिया गया है।

84 खंभों का सेनोपाथ – बूंदी के राजा ने इस खूबसूरत संरचना को बनवाया था। उन्होंने 84 खंभों के सेनोपाथ को अपनी पत्नी नर्स देवा की याद में बनवाया था। इस इमारत में अलग-अलग 84 खंभे खड़े हैं जिन पर हाथी, परियां और हिरणों की नक्काशी की गई है। इन्हें देखकर पर्यटक विशेष रूप से आकर्षित होते हैं।

ब्रज भूषण की हवेली – ब्रज भूषण की हवेली बूंदी में एक सुंदर होटल है। इस होटल में कई आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिसमें रेस्त्रां से लेकर पिकअप सुविधा तक शामिल है। यह लोकप्रिय होटल बूंदी शहर के मध्य में स्थित है।

धबाई कुंड – बूंदी के धबाई कुंड को राजस्थान का सबसे बड़ा कुंड माना जाता है। यह शहर का सबसे लोकप्रिय और सबसे ज्यादा देखा जाने वाला स्थान है। यह कुंड दरअसल शाही राजपूत राजाओं द्वारा बनवाए गहरे कुंए होते हैं।

रानीजी की बावड़ी – बूंदी अपने बावड़ियों के लिए जाना जाता है। रानीजी की बावड़ी भी बूंदी की ऐसी ही एक आकर्षक जगह है। यह राजस्थान की सबसे शानदार बावड़ियों में से एक मानी जाती है। इस बावड़ी के खंभों पर उत्कृष्ट नक्काशी की हुई है तथा इसकी गहराई लगभग 46 मीटर है जो पर्यअकों को अपनी और आकर्षित करती है। यहां पर ऊंची मेहराबी द्वार भी है जिसका निर्माण रानी नाथावतजी ने ईसवी सन् 1699 में करवाया था।

रतन दौलत – बूंदी का यह विशाल स्मारक महान राजपूत राजाओं के शौर्य और उपलब्धियों की गवाही देता है। राजा राव रतन सिंह जो कि एक बहादुर और महान राजपूत राजा थे, उन्होंने रतन दौलत का बूंदी में निर्माण करवाया था।

सुख महल – सुंदर बगीचे की हरियाली के बीचों बीच जेत सागर झील पर एक अद्भुत ग्रीष्मकालीन महल है। ऐसा माना जाता है कि सुख महल से मुख्य महलों तक एक भूमिगत सुरंग भी निकलती है। इस सुरंग का प्रयोग पुराने समय में युद्ध के दौरान किया जाता था।

चित्रशाला – यह चित्रशाला मनमोहक मण्डप और लघु भित्ति चित्रों की दीर्घा महल से अलंकृत हैं। राग माला और रासलीला, राधाकृष्ण के परिष्कृत रंगीन दृश्य दीवार पर अंकित है। आज बूंदी के भिति चित्र विश्व प्रसिद्ध है व बूंदी की यात्रा चित्रशाला देखेने बिना पूण्र नहीं मानी जाती है।

फूल सागर – बीसवीं शताब्दी में बना फूल सागर एक आधुनिक महल है। जिसमें मानव निर्मित तालाब व सुंदर बीगचे है। अब यहां बूंदी के पूर्व शासक निवास करते है।

झालावाड़ – बूंदी से झालावाड़ तक का सफर दक्षिण-पूर्वी राजस्थानी इलाके की प्राकृतिक खूबसूरती से यादगार बन जाता है। झालावाड़ के दूसरे आकर्षणों में शानदार ऐतिहासिक किले और शासकीय संग्रहालय हैं।

बीजोलिया – बूंदी से बीजोलिया का भ्रमण प्राचीन बीजोलिया किले और उसके अंदर बसे शहर से यादगार बन जाता है। बीजोलिया बूंदी से 50 किलोमीटर दूर है। यह बूंदी से सड़क और रेल के जरिए जुड़ा है। खुद के वाहन से यात्रा कर रहे सैलानियों को बूंदी चित्तौड़गढ़ सड़क से यात्रा करना होती है।

यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय :

बूंदी की जलवायु उष्णकटिबंधीय है। यहां गर्मियों में अधिक गर्मी और सर्दियों में अधिक ठंड पड़ती है। बूंदी की सुंदरता का आनंद लेने के लिए सबसे अच्छा समय सर्दियों के मौसम के दौरान होता है। अक्टूबर से अप्रैल की अवधि बूंदी जाने के लिए सबसे उत्तम मानी जाती है।

 

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