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अगर आप एडवेंचर के शौक़ीन है तो यहाँ जरुर जाएँ : झीलों का शहर नैनीताल

Posted by anvin404 on October 22, 2017
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दूर पर्वतांचल देवभूमि उत्तराखंड में समुद्र तल से 1958 मीटर की ऊंचाई पर बसा खूबसूरत पर्यटक स्थल नैनीताल, वर्षों से देश-विदेश के सैलनियों को आकर्षित करता रहा है।

इसके अलावा यह स्थल उत्तम शिक्षा का केन्द्र भी समझा जाता है। नैनीताल की खोज 18 नवम्बर 1841 को बैरन नामक अंग्रेज ने की थी जो अपने दो अन्य सहयोगियों के साथ पर्वतीय भ्रमण पर निकले थे। उस वक्त विदेशी शासन के चलते अंग्रेजों के नैनीताल की जलवायु और चारों ओर से घिरा हुआ प्राकृतिक सौंदर्य इतना अधिक पसंद आया कि उन्होंने इसे तत्कालीन संयुक्त प्रान्त की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया। ग्रीष्मकाल में उत्तर प्रदेश के राज्यपाल नैनीताल में अंग्रेजों द्वारा बनाये गए राजभवन में ही रहते है। नैनीताल में प्रवेश करते ही मनोरम झील आगन्तुकों का स्वागत करती है जो नैनी झील के नाम से प्रसिद्ध है।

प्राकृतिक सौन्दर्य : नैनीताल के पर्वत, मंदिर तथा आसपास की झीलें अपने आप में अपना इतिहास संजोये हैं। यहां लगभग दर्जन भर से अधिक मंदिर तथा झीलें हैं तथा आधे दर्जन से अधिक चोटियां हैं। सबसे अधिक लगभग सौ से अधिक वर्ष पुराने मंदिर में नैयना देवी को पूजा जाता है। यहां के लोगों का मानना है कि नैयना देवी उन्हें हर आपदा से बचाये रखती है तथा उनकी मनोकामना पूर्ण करती है। यहां से भारत की कई ऊंची तथा प्रसिद्ध चोटियों के साथ-साथ हिमालय को पूरे बर्फ से ढका हुआ देखा जा सकता है। इनके अतिरिक्त टिफिन टाप, किलवरी बारापत्थर, लैन्डस एन्ड आदि प्रमुख चोटियां हैं। नैनीताल को झीलों की नगरी तथा सरोवर नगरी के नाम से जाना जाता है। यहां आने वाले देशी-विदेशी पर्यटक इन झीलों में नौकायन का आनन्द उठाते है। सुंदर पहाड़ तथा मनोहारी प्राकृतिक दृश्य यहां पर्यटकों को तो आकर्षित करते ही हैं, साथ-ही-साथ यहां का शांत वातावरण शिक्षा के लिए भी उत्कृष्ट स्थान माना जाता है। नैनीताल से शिक्षा प्राप्त कर चुके अनेक विद्यार्थी इस वक्त विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर कार्य कर रहे है। इस वक्त भी यहां के दर्जनों स्कूलों में देश के कोने-कोने से आये छात्रा-छात्राओं के साथ-साथ कई विदेशी छात्रा-छात्रायें शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

प्रमुख आकर्षण  : खुरपाताल द्रश्य स्थल और वनस्पति उद्यान, लवर्स पॉइंट, साडियाताल जलप्रपात, नैनीझील दर्शन पॉइंट, नैनीताल चिड़ियाघर, राजभवन-गवर्नर हाउस, स्नो व्यू, हनुमानगढ़ी मंदिर, नैनादेवी मंदिर, नैना पीक, तल्लीताल और मल्लीताल, किलवरी, लड़ियाकांटा, देवपाटा और केमल्स बैक, डेरोथी सीट और टिफिन टॉप, स्नोव्यू और हनी-बनी, रोप-वे या ट्रॉली, आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जरवेशनल साइंस अादि।

नैनीताल में एडवेंचर : एडवेंचर के शाैकिन लाेग यहां अाकर वाटर स्पोर्ट्स का मजा लें सकते है। यहां का नैनीताल याट कल्ब नौकायन परंपरा और विरासत को सहेजे हुए है। गर्मी के मौसम में नैनीताल की झील में स्विमिंग कॉम्पटीशन भी आयोजित किए जाते हैं। इसके अलावा कैनोइंग और कयाकिंग प्रतियोगिता का आयोजन भी इस खूबसूरत झील में होते रहते हैं। अगर आप स्काई एडवेंचर का लुत्फ लेना चाहते हैं तो नौकुचियाताल में पैरासेलिंग की सुविधा उपलब्ध है। अनुभवी पैरासेलर्स की देखरेख में आप यहां आकाश के इस रोमांच में डूब सकते हैं। एडवेंचर स्पोर्ट्स में हॉटबलूनिंग भी अपना अलग स्थान रखता है और यह नैनीताल का एक और आकर्षण है। सूखाताल में हॉटबलूनिंग के कैंप आयोजित किए जाते हैं। पर्वतारोहण के शौकीनों के लिए नैनीताल में काफी कुछ है। नैनीताल माउंटेनियरिंग क्लब पर्वतारोहरण और रॉक क्लाइबिंग की ट्रेनिंग देता है। इसके अलावा यहां राज भवन के गोल्फ कोर्स में हर साल गोल्फ टूर्नामेंट का आयोजन होता है। यहां 9 होल गोल्फ कोर्स है। अलग-अलग मौसम में मल्लीताल के फ्लैट्स में हॉकी, फुटबॉल, क्रिकेट और बॉक्सिंग टूर्नामेंट का आयोजन किया जाता है। इसके अलावा नैनीताल आने वाले सैलानियों के लिए हॉर्स राइडिंग एक और आकर्षण है। यहां बारापत्थर से घोड़े किराए पर लेकर सैलानी नैनीताल की अलग-अलग चोटियों की सैर करते हैं।

नैनीताल का धार्मिक महत्व : स्कंद पुराण के मानस खंड में इसे ‘त्रि-ऋषि-सरोवर’ कहा गया है। ये तीन ऋषि अत्री, पुलस्थ्य और पुलाहा ऋषि थें। इस इलाके में जब उन्हें कहीं पानी नहीं मिला तो उन्होंने यहां एक बड़ा सा गड्ढा किया और उसमें मनसरोवर का पवित्र जल भर दिया। उसी सरोवर को आज नैनीझील के रूप में जाना जाता है। माना जाता है कि इस झील में डुबकी लगाने का महत्व मानसरोवर में डुबकी लगाने जितना ही पवित्र है। इसके अलावा नैनीताल को 64 शक्ति पीठों में से एक माना जाता है। यहां माता की आखें गिरी थी इसलिए इस जगह का नाम नैनीताल पड़ा। माता को यहां नैयना देवी के रूप में पूजा जाता है।

यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय : नैनीताल में साल भर अच्छा मौसम रहता है। नैनीताल की यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय मार्च से जून अाैर अक्टूबर से फरवरी के बीच का समय है। सर्दियों के दौरान भी इस जगह की यात्रा अच्छी रहती है।

क्या खरीदें : यहां की बनी मोमबत्तियां जरूर खरीदें। नैनीताल में ये हर जगह मिल जाती हैं। चीड़ की लकड़ी से बना सामान भी खरीद सकते हैं। माल रोड थोडा मंहगा है सस्ती खरीदारी के लिए मल्लीताल के बड़ा बाजार जाईये। ये नैनीताल का पुराना बाजार है।

यातायात और परिवहन : एनएच 87 नैनीताल को पूरे देश से जोड़ता है। नैनीताल में रेल और हवाई सेवाएं नहीं हैं, लेकिन यहां का नजदीकी रेलवे स्टेशन यहां से सिर्फ 34 किमी दूर काठगोदाम में है। काेलकाता से काठगोदाम स्लीपर क्लास का माध्यम लेते हैं ताे किराया करीब 595 रुपये, एसी थ्री टीयर का किराया करीब 1605 रुपये है। काठगोदाम से नैनीताल के लिए राज्य परिवहन की गाड़ियां दिन में हर समय उपलब्ध रहती हैं। इसके अलावा शेयर टैक्सी 100 रुपये प्रति व्यक्ति और बुक करने पर 500 रुपये में यहां रेलवे स्टेशन के बाहर ही मिल जाती हैं। अगर आप हवाई मार्ग से नैनीताल जाना चाहते हैं तो यहां का नजदीकी पंतनगर एयरपोर्ट करीब 65 किमी दूर है। पंतनगर एयरपोर्ट भारत के मुख्य शहरों जैसे दिल्ली, बैंगलोर और मुंबई आदि से जुड़ा हुआ है। काेलकाता से पंतनगर हवाई मार्ग का किराया करीब 5337 रुपये, (एक तरफा किराया) है, बशर्ते आपने बुकिंग चार माह पहले से ही करवायी हो।

कहा ठहरें : नैनीताल में आपकी जेब के हिसाब से ठहरने की कई सुविधाएं उपलब्ध हैं। आप चाहें तो महंगे विलासिता से भरपूर पांच सितारा होटल चुनें या फिर सरकारी गेस्ट और रेस्ट हाउस। यह आपकी पसंद और जेब पर निर्भर करता है, लेकिन इस बात का ध्यान जरूर रखें कि पीक सीजन के समय यहां पहले से बुकिंग करवा लें, अन्यथा आपको दिक्कत हो सकती है।

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